Pragat Santoshi Mata Ji Aarti

ओम् जय संतोषी माता,
दया भाव चित धायो, अन धनसुत दाता || टेक ||
लम्बोदरजी लाडली, संतोषी कहावे |
रिद्धि - सिद्धि फलदाता, सुख सम्पत लावे || १ || ओम् जय संतोषी माता.
कनक बदन कमलासन, शीश मुकुट सोवे |
चीर चमक चपलासन, नासां नथ पावे || २ || ओम् जय संतोषी माता.
रत्नों की गलमाला, मूरित मन चावे |
शुक्रवार सुखदाई, जन दर्शन आवे || ३ || ओम् जय संतोषी माता.
प्रगट रूप तिहारों, लाल सागर पावे |
कन्दरा माँय विराजो, पहाड़ छत्र छावे || ४ || ओम् जय संतोषी माता.
मारवाड़, गुजरात भारत जन यश तेरो गावे |
राव रंक साधु - जन, चरणों सिर नावे || ५ || ओम् जय संतोषी माता.
गुड अरु चना अति प्रिय, भोग धरे ध्यावे |
मनोकामना पूर्ण, इच्छा फल पावे || ६ || ओम् जय संतोषी माता.
निरधन को धन देवें, बाँझ पुत्र पावे |
गूँगा बोले मुख से, पंगु चल जावे || ७ || ओम् जय संतोषी माता.
त्रिशूल असी धारणी, पाय पात्र सोवे |
आर्शीवाद की मुद्रा, संकट दुःख खोवे || ८ || ओम् जय संतोषी माता.
'चेतन' दास चरण की आरती कथा गावे |
सदा सुखी संतोषी, उर आनन्द छावे || ९ || ओम् जय संतोषी माता.