एक भक्त की सेवा

            धर्म प्रिय सज्जन श्री चुन्नीलाल जी माली सांखला की धर्म पत्नी छोटाबाई चांदपोल, विद्याशाला, जोधपुर निवासी के श्री उदारामजी पुत्र रत्न में उदित हुये | माता - पिता धार्मिक प्रवृति के होने के कारण इनमें धार्मिक भावना जन्म से ही जागृत हो गई |
            युवावस्था में आपने अपने पूर्वजों द्वारा सेवित संतोषी माता का संवत् २०२० में दर्शन करने का अवसर मिला और मंदिर को सुन्दर रूप देने की ह्रदय में भावना जागृत हुई | आपने भागीरथी प्रयास किया| जिसके फलस्वरूप आज एक बालक भी आराम से माँ के मन्दिर तक पहुँच सकता है | पहले एक स्वस्थ नौजवान भी कठिनता से मन्दिर तक पहुँचता था | भक्त उदाराम जी के सफल प्रयासों द्वारा मन्दिर व पहाडों के बीच का रास्ता आज प्रकाश में बदल चुका है | इन्हीं के कठिन परिश्रम से माँ के मन्दिर का रूप बदल पाया |
            उदारामजी व अन्य सहयोगी भक्तजनों के प्रयासों से माता संतोषी के पास योगेश्वर महादेव का मन्दिर, कथा भवन, विश्राम गृह आदि बने| दर्शनार्थीगण इस कार्य को देखकर भक्त की मुक्त कंठ से सराहना करते है |
इस मन्दिर में प्रति वर्ष आसोज की नवरात्रि की अखण्ड ज्योति, हवन, कीर्तन होता है | हर तीसरे वर्ष भोगीशैल यात्री परिक्रमा कर अपनी यात्रा सफल करते है | वैसे तो पूरे भारत में संतोषी माता के मन्दिर हर गाँव हर शहर में बने हुए है | मगर यह मन्दिर प्राचीनतम है जहाँ पर प्राचीन काल में माताजी प्रगट हुई थी |
            इसलिए संतोषी माता का यह स्थान हजारों वर्ष पुराना है और देश के हर कोने से माताजी के भक्तगण माताजी का प्रमुख स्थान समझ कर ही हजारों लोग माँ के दर्शनार्थ आकर सच्चे मन से जो माँ का स्मरण करते है उनके सभी कार्य पूरे होते है |