उद्यापन की विधि

व्रत के उद्यापन में अढाई सेर खाजा ( मोमनदार पूरी ), खीर, चने का साग नैवेध रखे एवं घी का दीपक जलाकर प्रगट संतोषी माता की जय जयकार बोलकर नारियल तोडे | इस दिन घर में कोई व्यक्ति खटाई न खावे | खट्टी वस्तु खाने से माता का कोप होता है इसलिए उद्यापन के दिन दाल और साग किसी में भी खटाई न डालें, न दूसरों को खिलावें, इस दिन आठ लड़कों को भोज़न करावें |
देवर या जेठ के कुटुम्ब के मिलते हो तो उन्हें ही बुलाना चाहिये, नहीं तो पास पडौस के या ब्राह्मणों के आठ लड़कों को बुलावें| उन्हें खटाई को कोई वस्तु नहीं देनी चाहिये और यथा शक्ति सामर्थ्य अनुसार दान दक्षिणा में नकद पैसा न देकर कोई वस्तु ही दान में देनी चाहिए | व्रत करने वाला कथा सुनकर और प्रसाद लेकर एक समय भोज़न करें | ऐसा करने से संतोषी माता प्रसन्न होगी व मनोवांछित फल देगी |
भोग की स्तुति
करूँ विनती आपसे, भोग धरुं भर थाल |
आप आरोगो प्रेम से , भक्तन की प्रति पाल ||